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An 11-Day Self-Drive Spiritual & Cultural Journey Across India

  🚗✨ 4045 km of Faith, Family & Learning An 11-Day Self-Drive Spiritual & Cultural Journey Across India Some journeys are planned on maps, and some are planned by destiny. This 11-day, 4045 km self-drive road trip from Indore (MP) turned into a soulful blend of devotion, discovery, culture, patience, and priceless family bonding —especially for our 8-year-old kiddo , who returned richer in values than souvenirs. 🗓️ Trip Snapshot Travel mode: Personal car (self-driven 🚗) Total distance: 4045 km Total days: 11 Travel theme: Jyotirlingas, Jain Tirths, Shakti Peeths & Indian heritage Travel companions: Family ❤️ 🌄 Day 1: Indore → Pench → Nagpur We began our journey from Indore towards Pench National Park , with a spiritual halt at Matmor Jain Tirth . Unfortunately, accommodation at Pench didn’t work out—teaching us our first lesson of flexibility . Instead, destiny led us to Nagpur where we visited: Shri Mahalakshmi Jagdamba Mandir K...

Saiyaara Movie Real Review

 कल सैयारा फ़िल्म देखने का मौका मिला । हॉल में कुल 20 लोग भी नहीं थे ।मैं पूरी फ़िल्म के दौरान यही ढूँढ रहा था कि मुझे इसमें रोना कब है । जब इंटरवल तक रोना नहीं आया तो सोचा शायद भूख के कारण भीतर से रोने का माहौल नहीं बन रहा । कोक,पिज़्ज़ा और पॉपकॉन गटकने के बाद कमर कस चुका था कि अब तो रोना ही है । सच कह रहा हूँ कि मैं रोने के लिए तरस गया ।कई बार तो भीतर भीतर इस बात का रोना आ रहा था कि मुझे रोना नहीं आ रहा । अपने लिए घृणित भाव पैदा होने लगे कि मैं कैसा हूँ ,मेरे भीतर कोई दया धर्म है कि नहीं ।मैं एक छोटी सो सामाजिक जिम्मेदारी भी पूरी नहीं कर पा रहा ।बस रोना ही तो है थोड़ा सा बस इस सा कि मेरे पड़ोस वाले को पता लग जाये ये रो रहा है । खैर फ़िल्म देखकर रोना हो तो “मैरी कॉम”देख लीजिएगा । एक महिला के वास्तविक संघर्ष को जिस तरह से पर्दे पर लाया गया और उसने जिन हालातों से निकल कर देश के लिए खेला,जीता और देश का सम्मान बढ़ाया ।बिना किसी दिखावे के आपके नयन कोर पर कुछ बूंदे अटक ही जाएँगी ।। Got a chance to watch Saiyaara yesterday. Barely 20 people in the theatre. Spent the whole movie wondering...

Trip to Jaipur - Agra via sanwaria seth , salasar balaji , Khatu Shayam, vrindavan from Indore | My Travel Diary | Road Trip | Anshul Mehta

hello Reader, this is my first try to cover my trip details in form of a blog. Idea behind this is to provide bare minimum info about destinations and itinerary of my travel and if someone is looking for any destination details than this would be very helpful ( even including me if i plan later to revisit same places )  Hope you guys enjoy reading..  Major Destination Covered -  Indore --> Sanwaria Seth Mandir  --> Pushkar --> Ajmer --> Salasar balaji Temple --> Khatu Shayam temple --> Jaipur --> Govardhan Ji --> Barsana --> Vrindavan --> Mathura --> Agra --> Indore  Day 1 -->  Indore (M.P.) to Sanwaria seth Temple ( Rajasthan) We started our trip from Indore (M.P) to Shri Sanwaria Seth Mandir after having our lunch in indore. we covered approx. 350KM which take approx. 9hrs (with 2hrs break en-route) to reach our day 1 destination and our first night halt was at Sanwaria seth temple.  Below are some quick d...

don't heart your body with your behaviour - self realisation of your habits

नाज़ुक अंगो को घायल कर रहा आपका कठोर व्यवहार ।‌।             1- *आमाशय* घायल होता है जब आप प्रातः काल अल्पाहार नही करते हैं। 2- *किडनी* घायल होती है जब आप 24 घण्टे में 10 -12 गिलास पानी नही पीते  3- *पित्ताशय* घायल होता है जब आप रात्रि 11 बजे तक सोते नही है और सूर्योदय से पूर्व जागते नही हैं। 4- *छोटी आंत* घायल होती है जब आप ठंडा और बासी भोजन करते हैं। 5- *बड़ी आंत* घायल होती है जब आप बहुत तला भुना और मसालेदार भोजन करते हैं। 6- *फेफड़े* घायल होते हैं जब आप सिगरेट,और धुयें आदि से प्रदूषित वातावरण में सांस लेते हैं। 7- *लिवर* घायल होता है जब आप बहुत भारी जंक, फ़ास्ट फ़ूड खाते हैं। 8- *हृदय* घायल होता है जब आप अपने भोजन में अधिक नमक और केमिकल रिफाइंड तेल खाते हैं। 9- *अग्न्याशय* घायल होता है जब आप मीठी चीजे ज्यादा मात्रा में खाते हैं क्योंकि वो स्वादिष्ट और सहज उपलब्ध हैं। 10- *आँखें* घायल होती हैं जब आप कम प्रकाश में मोबाईल और कम्प्यूटर स्क्रीन पर काम करते हैं। 11- *मस्तिष्क* घायल होता है जब आप नकारात्मक सोचने लगते हैं। 12- *आत्मा* घायल होती है जब आप नैतिकत...

2 Stories of Dream big. Set goals. Work hard

2 stories: 1. Yahoo refused Google 2. Nokia refused Android Moral: 1. Update yourself with time, else you will become obsolete 2. Taking no risk is the biggest risk. Take risks and adopt new technologies. 2 more stories: 1. Google acquired YouTube and Android 2. Facebook acquired Instagram and WhatsApp Moral: 1. Become so powerful of that your enemies become your allies 2. Grow fast, become big and then eliminate competition 2 more stories: 1. Barack Obama was a ice cream seller 2. Elon Musk was a worker in a lumber mill Moral: 1. Don’t judge people based on their past jobs 2. Your present doesn’t decide your future, your courage and hard work does 2 more stories: 1. Colonel Sanders created KFC at the age of 65 2. Jack Ma who was rejected by KFC founded Alibaba Moral: 1. Age is just a number - you can be successful at any age 2. Never ever give up in life - only those who never give up win 2 final stories: 1. Owner of Ferrari insulted a tractor maker 2. The tractor maker created Lambor...

हमारा भी एक जमाना था old school days

खुद ही स्कूल जाना पड़ता था क्योंकि साइकिल बस आदि से भेजने की रीत नहीं थी, स्कूल भेजने के बाद कुछ अच्छा बुरा होगा ऐसा हमारे मां-बाप कभी सोचते भी नहीं थे... उनको किसी बात का डर भी नहीं होता था, 🤪 पास/फेल यही हमको मालूम था... % से हमारा कभी संबंध ही नहीं था... 😛 ट्यूशन लगाई है ऐसा बताने में भी शर्म आती थी क्योंकि हमको ढपोर शंख समझा जा सकता था... 🤣🤣🤣 किताबों में पीपल के पत्ते, विद्या के पत्ते, मोर पंख रखकर हम होशियार हो सकते हैं ऐसी हमारी धारणाएं थी... ☺️☺️ कपड़े की थैली में...बस्तों में..और बाद में एल्यूमीनियम की पेटियों में...किताब कॉपियां बेहतरीन तरीके से जमा कर रखने में हमें महारत हासिल थी.. ..  😁 हर साल जब नई क्लास का बस्ता जमाते थे उसके पहले किताब कापी के ऊपर रद्दी पेपर की जिल्द चढ़ाते थे और यह काम...एक वार्षिक उत्सव या त्योहार की तरह होता था.....  🤗  साल खत्म होने के बाद किताबें बेचना और अगले साल की पुरानी किताबें खरीदने में हमें किसी प्रकार की शर्म नहीं होती थी..क्योंकि तब हर साल न किताब बदलती थी और न ही पाठ्यक्रम... 🤪 हमारे माताजी पिताजी को हमारी...

ताश के पत्तो का मर्म ~ Playing cards secret

ताश खेलने पर बहुत लोग आलोचना करते है पर इसका ज्ञान भी जरूरी है। !!   ताश का मर्म  !! हम ताश खेलते है, अपना मनोरंजन करते है। पर शायद कुछ ही लोग जानते होंगे कि unताश का आधार वैज्ञानिक है व साथ साथ ही प्राकृति से भी जुड़ा हुआ है:-  आयताकार मोंटे कागज़ से बने पत्ते चार प्रकार के  .....ईंट, पान, चिड़ी, और हुक्म, प्रत्येक 13 पत्तों को मिलाकर कुल 52 पत्ते होते हैं। पत्ते.... एक्का से दस्सा, गुलाम, रानी एवं राजा ।      1. 52 पत्ते .......52 सप्ताह 2. 4 प्रकार के पत्ते .......4 ऋतु          3. प्रत्येक रंग के 13 पत्ते....प्रत्येक ऋतु में 13 सप्ताह 4. सभी पत्तों का जोड़ ..1 से 13 = 91 × 4 = 364 5. एक जोकर..... 364+1= 365 दिन...1 वर्ष 6. दूसरा जोकर गिने..365 +1=366  दिन..लीप वर्ष 7. 52 पत्तों में 12 चित्र वाले पत्ते - 12 महिने 8. लाल और काला रंग ... दिन और रात!   💥  पत्तों का अर्थ :- 1   दुक्की - पृथ्वी और आकाश 2.  तिक्की- ब्रम्हा, विष्णू, महेश 3.  चौकी - चार वेद (अथर्व वेद, सामवेद, ऋग्...

ढाई अक्षर प्रेम के

*मैंने कभी पढा था ... *"पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय, *ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय।।" *बहुत अथक प्रयास के बाद अब पता लगा ये ढाई अक्षर क्या है- *ढाई अक्षर के ब्रह्मा और ढाई अक्षर की सृष्टि। *ढाई अक्षर के विष्णु और ढाई अक्षर की लक्ष्मी। *ढाई अक्षर के कृष्ण .. *ढाई अक्षर की दुर्गा .. ढाई अक्षर की शक्ति। *ढाई अक्षर की श्रद्धा और ढाई अक्षर की भक्ति। *ढाई अक्षर का त्याग और ढाई अक्षर का ध्यान। *ढाई अक्षर की तुष्टि और ढाई अक्षर की इच्छा। *ढाई अक्षर का धर्म और ढाई अक्षर का कर्म। *ढाई अक्षर का भाग्य और ढाई अक्षर की व्यथा। *ढाई अक्षर का ग्रन्थ और ढाई अक्षर का सन्त। *ढाई अक्षर का शब्द और ढाई अक्षर का अर्थ। *ढाई अक्षर का सत्य और ढाई अक्षर की मिथ्या। *ढाई अक्षर की श्रुति और ढाई अक्षर की ध्वनि। *ढाई अक्षर की अग्नि और ढाई अक्षर का कुण्ड। *ढाई अक्षर का मन्त्र और ढाई अक्षर का यन्त्र। *ढाई अक्षर की श्वांस और ढाई अक्षर के प्राण। *ढाई अक्षर का जन्म ढाई अक्षर की मृत्यु। *ढाई अक्षर की अस्थि और ढाई अक्षर की अर्थी। *ढाई अक्षर का प्यार और ढाई अक्षर का युद्ध। *ढाई अक्षर का मित्र और ढाई ...

god's home sweet home - भगवान का घर

  कल दोपहर मैं बैंक में गया था। वहाँ एक बुजुर्ग भी उनके काम से आये थे। वहाँ वह कुछ काम की बात ढूंढ रहे थे। मुझे लगा शायद उन्हें पेन चाहिये। इसलिये उनसे पुछा तो, वह बोले "बिमारी के कारण मेरे हाथ कांप रहे हैं और मुझे पैसे निकालने की स्लीप भरनी हैं। उसके लिये मैं देख रहा हूँ कि किसी की मदद मिल जाये तो अच्छा रहता।"    मैं बोला "आपको कोई हर्ज न हो तो मैं आपकी स्लीप भर दूँ क्या ?"    उनकी परेशानी दूर होती देखकर उन्होंने मुझे स्लीप भरने की अनुमति दे दी। मैंने उनसे पुछकर स्लीप भर दी।    रकम निकाल कर उन्होंने मुझसे पैसे गिनने को कहा। मैंने पैसे गिनकर उन्हें वापस कर दिये।   मेरा और उनका काम लगभग साथ ही समाप्त हुआ तो, हम दोनों एक साथ ही बैंक से बाहर आ गये तो, वह बोले "साँरी तुम्हें थोड़ा कष्ट तो होगा। परन्तु मुझे रिक्षा करवा दोगे क्या ? भरी दोपहर में रिक्षा मिलना कष्टकारी होता हैं।" मैं बोला "मुझे भी उसी तरफ जाना हैं। मैं आपको कार से घर छोड़ दूँ तो चलेगा क्या ?"  वह तैयार हो गये। हम उनके घर पहुँचे। घर क्या बंगला कह सकते हो। 60' × 100' के...

Journey of Life like a train रेलगाड़ी के सफर सी हो गई है जिंदगी

रेलगाड़ी के सफर सी हो गई है जिंदगी। बस चले जा रहे है.. वाशरूम जाओ और फिर आकर अपनी बर्थ पर बैठ जाओ.. खाना खाओ और फिर से अपनी बर्थ पर लेट जाओ.. मन ना लगे तो बालकनी तक घूम आओ और फिर से अपनी बर्थ पर बैठ जाओ.. ना चाहते हुए भी फुल पत्तियां बिल्डिंग गिन आओ और फिर से अपनी बर्थ पर लेट जाओ.. बिना किसी वजह अपनो से तर्क वितर्क करो और फिर से अपनी बर्थ पर लेट जाओ.. दिन भर मोबाइल पर विडियोज देखते रहो और सफर का आनंद लेते रहो.. सफर लंबा है, जाना कहा मालूम नही  बस आनंद लेते जाओ, बर्थ पर लेटे जाओ... ~ A24M

True Father's - Indian footprint in different areas

True Fathers Of the Indian Civilization never appeared in our syllabus ... 1. *Father of Astronomy:* Aryabhatta ; work - Aryabhattiyam; 2. *Father of Astrology:* Varahamihira , works; Panchasiddhantika, Bruhat Hora Shastra;  3. *Fathers of Surgery:* Charaka and Sushruta , works : Samhitas; 4. *Father of Anatomy:* Patanjali , work: Yogasutra;  5. *Father of Yoga :* Patanjali , work : Yogasutra;  6. *Father of Economics:* Chanakya , work: Arthashshtra; 7. *Father of Atomic theory:* Rishi Kanada , Work : Kanada sutras;  8. *Father of Architecture :* Vishwakarma; 9. *Father of Aero Dynamics:* Mayasura , work : Vastu Darpana;  10. *Father of Medicine:* Dhanvanthri , first propounded Ayurveda;  11. *Father of Grammar:* Panini , work: Vyakarana Deepika;  12. *Father of Natyashastra :* Bharatamuni , work : Natyashastra; 13. *Father of Kavya (literature) :* Krishna Dwaipayana (VedaVyasa) works ; Mahabharata , Ashtaadasha Puranas;  14. *Father of Playwritin...

अमृत से भरे कलश । Powerful and prosperous Indian Traditional culture

हमारे पास तो पहले से ही अमृत से भरे कलश थे... फिर हम वो अमृत फेंक कर उनमें कीचड़ भरने का काम क्यों कर रहे हैं...? हार को हरा दो , इससे पहले की हार आपको हरा दे।   जरा इन पर विचार करें... ० यदि मातृनवमी थी, तो मदर्स डे क्यों लाया गया ? ० यदि कौमुदी महोत्सव था, तो वेलेंटाइन डे क्यों लाया गया ? ० यदि गुरुपूर्णिमा थी, तो टीचर्स डे क्यों लाया गया ? ० यदि धन्वन्तरि जयन्ती  थी, तो डाक्टर्स डे क्यों लाया गया ? ० यदि विश्वकर्मा जयंती  थी, तो प्रद्यौगिकी दिवस क्यों लाया गया ? ० यदि सन्तान सप्तमी  थी, तो चिल्ड्रन्स डे क्यों लाया गया ? ० यदि नवरात्रि  और कन्या भोज  था, तो डॉटर्स डे क्यों लाया गया ? ० रक्षाबंधन  है तो सिस्टर्स डे क्यों ? ० भाईदूज  है ब्रदर्स डे क्यों ? ० आंवला नवमी , तुलसी विवाह  मनाने वाले हिंदुओं को एनवायरमेंट डे की क्या आवश्यकता ? ० केवल इतना ही नहीं, नारद जयन्ती   ब्रह्माण्डीय पत्रकारिता दिवस है... ० पितृपक्ष  7 पीढ़ियों तक के पूर्वजों का पितृपर्व है... ० नवरात्रि  को स्त्री के नवरूप दिवस के रूप म...

From where to where Life's secret - हम कहाँ से कहाँ आ गए

Tea and ban-maska पहले भटूरे को फुलाने के लिये उसमें Eno डालिये ..... फिर भटूरे से फूले पेट को पिचकाने के लिये Eno पीजिये जीवन के कुछ गूढ़ रहस्य आप कभी नहीं समझ पायेंगे 🤔 जिसने भी लिखा कमाल का लिखा --  पांचवीं तक स्लेट की बत्ती को जीभ से चाटकर कैल्शियम की कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थी लेकिन इसमें पापबोध भी था कि कहीं विद्यामाता नाराज न हो जायें । पढ़ाई का तनाव हमने पेन्सिल का पिछला हिस्सा चबाकर मिटाया था । "पुस्तक के बीच  पौधे की पत्ती और मोरपंख रखने से हम होशियार हो जाएंगे ऐसा हमारा दृढ विश्वास था"।  कपड़े के थैले में किताब कॉपियां जमाने का विन्यास हमारा रचनात्मक कौशल था । हर साल जब नई कक्षा के बस्ते बंधते तब कॉपी किताबों पर जिल्द चढ़ाना हमारे जीवन का वार्षिक उत्सव था । माता पिता को हमारी पढ़ाई की कोई फ़िक्र नहीं थी , न हमारी पढ़ाई उनकी जेब पर बोझा थी ।  सालों साल बीत जाते पर माता पिता के कदम हमारे स्कूल में न पड़ते थे ।  एक दोस्त को साईकिल के डंडे पर और दूसरे को पीछे कैरियर पर बिठा हमने कितने रास्ते नापें हैं , यह अब याद नहीं बस कुछ धुंधली सी स्मृतियां हैं ।...

Indian Currency Counter Android App

Happy to announce my first ever app deployed on Google play store.. 😊 * Currency Counter * for daily note counting need .. useful for shop owners, bankers , people who are working on finance domain.. etc.. Please download and support.. Looking forward to hear your feedback 😊 App link to Google play store : https://play.google.com/store/apps/details?id=com.a24m.currencycounter App details : App helps to count notes of different denomination. App helps to count notes of different denomination. Useful for people working in finance domain, calculate daily counter of a shop, bank etc. Easy and simple user interface. Denomination support 2000, 1000, 500, 200, 100, 50, 20, 10, AND COINS. Grand Total shown at bottom where it was more user friendly Reset option provide to clear up screen. Total amount also shown in words. Auto total calculation Support dark mode MADE IN INDIA WITH ❤

which is most effective? knowledge Vs experience

जब कोई चीज मुफ्त मिल रही हो, तो समझ लेना कि आपको इसकी कोई बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। नोबेल विजेता डेसमंड टुटू ने एक बार कहा था कि ‘जब मिशनरी अफ्रीका आए, तो उनके पास बाईबल थी, और हमारे पास जमीन। उनहोंने कहा 'हम आपके लिए प्रार्थना करने आये हैं।’ हमने आखें बंद कर लीं,,, जब खोलीं तो हमारे हाथ में बाईबल थी, और उनके पास हमारी जमीन।’ इसी तरह जब सोशल नैटवर्क साइट्स आईं, तो उनके पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और हमारे पास आजादी और निजता थी। उन्होंनें कहा 'ये मुफ्त है।’ हमने आखें बंद कर लीं, और जब खोलीं तो हमारे पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और उनके पास हमारी आजादी और निजी जानकारियां। जब भी कोई चीज मुफ्त होती है, तो उसकी कीमत हमें हमारी आजादी दे कर चुकानी पड़ती है।  “ज्ञान से शब्द समझ आते हैं, और अनुभव से अर्थ”

If Corona COVID-19 had a CV / resume ?

Humourous but true If Corona had a CV, here's how it would read: 1. Responsible for Global Digital Transformation and fast-tracking. 2.Reduction of Global CO2 emission. 3.Five million jobs "restructuring". 4.Global Hygiene initiatives:  Ensured 100% compliance on washing hands... leading to collateral reduction of other communicable diseases. 5. Made global industry shift to WFH - saved exposure and costs. 6. Reduction in global noise pollution by making everyone keep their mouth shut (while masked). 7. Taught cooking, vegetable shopping, housekeeping to many. 8. Highlighted the importance of governance, adaptability and long term planning, by all sectors. 9. Spiritual contribution - Provided ample time to all egoistic and self-centered people to contemplate their mortal nature. 10. Provided a big boost to the Pharma sector, brought small utility stores back into the limelight. Corona’s CV could look better than that of many CEOs!

who is true wealthy person? सच्चा अमीर व्यक्ति कोन??

"दुनिया के सबसे धनवान व्यक्ति बिल गेट्स से किसी ने पूछा - 'क्या इस धरती पर आपसे भी अमीर कोई है ? बिल गेट्स ने जवाब दिया - हां, एक व्यक्ति इस दुनिया में मुझसे भी अमीर है। कौन -!!!!! बिल गेट्स ने बताया: एक समय मे जब मेरी प्रसिद्धि और अमीरी के दिन नहीं थे, मैं न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर था.. वहां सुबह सुबह अखबार देख कर, मैंने एक अखबार खरीदना चाहा,पर मेरे पास खुदरा पैसे नहीं थे.. सो, मैंने अखबार लेने का विचार त्याग कर उसे वापस रख दिया.. अखबार बेचने वाले लड़के ने मुझे देखा, तो मैंने खुदरा पैसे/सिक्के न होने की बात कही.. लड़के ने अखबार देते हुए कहा - यह मैं आपको मुफ्त में देता हूँ.. बात आई-गई हो गई.. कोई तीन माह बाद संयोगवश उसी एयरपोर्ट पर मैं फिर उतरा और अखबार के लिए फिर मेरे पास सिक्के नहीं थे।उस लड़के ने मुझे फिर से अखबार दिया, तो मैंने मना कर दिया। मैं ये नहीं ले सकता.. उस लड़के ने कहा, आप इसे ले सकते हैं, मैं इसे अपने प्रॉफिट के हिस्से से दे रहा हूँ.. मुझे नुकसान नहीं होगा। मैंने अखबार ले लिया...... 19 साल बाद अपने प्रसिद्ध हो जाने के बाद एक दिन मुझे उस लड़के की याद आयी और मै...

don't worry be happy - मत परेशान हो मस्त रहो व्यस्त रहो क्योंकि

1. चालीस साल की अवस्था में "उच्च शिक्षित" और "अल्प शिक्षित" एक जैसे ही होते हैं। (ब्लकि अल्प शिक्षित अधिक कमा लेते हैं) 2. पचास साल की अवस्था में "रूप" और "कुरूप" एक जैसे ही होते हैं। (आप कितने ही सुन्दर क्यों न हों झुर्रियां, आँखों के नीचे के डार्क सर्कल छुपाये नहीं छुपते) 3. साठ साल की अवस्था में "उच्च पद" और "निम्न पद" एक जैसे ही होते हैं।(चपरासी भी अधिकारी के सेवा निवृत्त होने के बाद उनकी तरफ़ देखने से कतराता है) 4. सत्तर साल की अवस्था में "बड़ा घर" और "छोटा घर" एक जैसे ही होते हैं। (घुटनों का दर्द और हड्डियों का गलना आपको बैठे रहने पर मजबूर कर देता है, आप छोटी जगह में भी गुज़ारा कर सकते हैं) 5. अस्सी साल की अवस्था में आपके पास धन का "होना" या "ना होना" एक जैसे ही होते हैं। ( अगर आप खर्च करना भी चाहें, तो आपको नहीं पता कि कहाँ खर्च करना है) 6. नब्बे साल की अवस्था में "सोना" और "जागना" एक जैसे ही होते हैं। (जागने के बावजूद भी आपको नहीं पता कि क्या करना ...

ek chup, so sukh - एक चुप, सौ सुख - हिंदी कहानियां

!! --👇एक चुप सौ सुख👇-- !! एक मछली मार कांटा डाले तालाब के किनारे बैठा था। काफी समय बाद भी कोई मछली कांटे में नहीं फँसी, ना ही कोई हलचल हुई तो वह सोचने लगा... कहीं ऐसा तो नहीं कि मैने कांटा गलत जगह डाला है, यहाँ कोई मछली ही न हो! उसने तालाब में झाँका तो देखा कि उसके कांटे के आसपास तो बहुत-सी मछलियाँ थीं। उसे बहुत आश्चर्य हुआ कि इतनी मछलियाँ होने के बाद भी कोई मछली फँसी क्यों नहीं! एक राहगीर ने जब यह नजारा देखा तो उससे कहा: लगता है भैया, यहाँ पर मछली मारने बहुत दिनों बाद आए हो! अब इस तालाब की मछलियाँ कांटे में नहीं फँसती।  मछली मार ने हैरत से पूछा: क्यों, ऐसा क्या है यहाँ? राहगीर बोला: पिछले दिनों तालाब के किनारे एक बहुत बड़े संत ठहरे थे।उन्होने यहाँ मौन की महत्ता पर प्रवचन दिया था। उनकी वाणी में इतना तेज था कि जब वे प्रवचन देते तो सारी मछलियाँ भी बड़े ध्यान से सुनतीं। यह उनके प्रवचनों का ही असर है कि उसके बाद जब भी कोई इन्हें फँसाने के लिए कांटा डालकर बैठता है तो ये मौन धारण कर लेती हैं। जब मछली मुँह खोलेगी ही नहीं तो कांटे में फँसेगी कैसे? इसलिए बेहतर यहीं होगा कि आप कह...

कुछ ज़रूरतें पूरी, तो कुछ ख्वाहिशें अधूरी इन्ही सवालों का संतुलित जवाब है – जिंदगी

समुद्र के किनारे एक लहर आई। वो एक बच्चे की चप्पल अपने साथ बहा ले गई। बच्चा ने रेत पर अंगुली से लिखा-“ समुद्र चोर है।” उसी समुद्र के दूसरे किनारे पर कुछ मछुआरों ने बहुत सारी मछली पकड़ी। एक मछुआरे ने रेत पर लिखा-“ समुद्र मेरा पालनहार है। ” एक युवक समुद्र में डूब कर मर गया। उसकी मां ने रेत पर लिखा-“ समुद्र हत्यारा है। ” दूसरे किनारे पर एक गरीब बूढ़ा, टेढ़ी कमर लिए रेत पर टहल रहा था। उसे एक बड़ी सीप में अनमोल मोती मिला। उसने रेत पर लिखा-“ समुद्र दानी है ।” अचानक एक बड़ी लहर आई और सारे लिखे को मिटा कर चली गई। लोग समुद्र के बारे में जो भी कहें, लेकिन विशाल समुद्र अपनी लहरों में मस्त रहता है। अपना उफान और शांति वह अपने हिसाब से तय करता है। अगर विशाल समुद्र बनना है तो किसी के निर्णय पर अपना ध्यान ना दें। जो करना है अपने हिसाब से करें। जो गुजर गया उसकी चिंता में ना रहें। हार-जीत, खोना-पाना, सुख-दुख इन सबके चलते मन विचलित ना करें। अगर जिंदगी सुख शांति से ही भरी होती तो आदमी जन्म लेते समय रोता नहीं। जन्म के समय रोना और मरकर रुलाना इसी के बीच के संघर्ष भरे समय को जिंदगी कहते हैं। ‘कुछ ज़रूरतें पूर...