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हम क्या से क्या हो गए

जाने क्यूं अब शर्म से,  चेहरे गुलाब नही होते। जाने क्यूं अब मस्त मौला मिजाज नही होते।
पहले बता दिया करते थे,  दिल की बातें। जाने क्यूं अब चेहरे,  खुली किताब नही होते।
सुना है बिन कहे ही  दिल की बात समझ लेते थे, गले लगते ही दोस्त हालात समझ लेते थे।
जब ना फेस बुक थी .... ना व्हाटस एप था .... ना मोबाइल था ..... एक चिट्ठी से ही दिलों के जज्बात समझ लेते थे।
सोचता हूं, हम कहां से कहां आ गये।
प्रेक्टीकली सोचते सोचते भावनाओं को खा गये।
अब भाई भाई से समस्या का समाधान कहां पूछता है ..... अब बेटा बाप से उलझनों का निदान कहां पूछता है ..... बेटी नही पूछती मां से गृहस्थी के सलीके। अब कौन गुरु के चरणों में बैठकर ज्ञान की परिभाषा सीखे।
परियों की बातें अब किसे भाती हैं .... अपनो की याद अब किसे रुलाती है ...... अब कौन गरीब को सखा बताता है ..... अब कहां कृष्ण सुदामा को गले लगाता है .....
जिन्दगी मे हम प्रेक्टिकल हो गये है .... रोबोट बन गये हैं सब ... इंसान जाने कहां खो गये हैं ..... !!

live life.. Dont fight...

तू जिंदगी को जी उसे समझने की कोशिश न कर
सुन्दर सपनो के ताने बाने बुन उसमे उलझनेकी कोशिश न कर
चलते वक़्त के साथ  तू भी चल उसमे सिमटने की  कोशिश न कर
अपने हाथो को फैला,  खुल कर साँस ले अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर
मन में चल रहे युद्ध को विराम दे खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न कर
कुछ बाते खुदा पर छोड़ दे सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर
जो मिल गया उसी में खुश रह जो सकून छीन ले वो पाने की कोशिश न कर
रास्ते की सुंदरता का  लुत्फ़ उठा मंजिल पर जल्दी पहुचने की कोशिश न कर.....🌹